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क्या वैभव सूर्यवंशी(Vaibhav Suryavanshi)ने तोड़ा रोहित शर्मा का रिकॉर्ड? सिर्फ़ 32 गेंदों में शतक!Incredible!

वैभव सूर्यवंशी

वैभव सूर्यवंशी का नाम आपने हाल ही में सुना होगा, खासकर अगर आप क्रिकेट की दुनिया से वाकिफ हैं। बिहार के समस्तीपुर का यह युवा तुर्क भारतीय क्रिकेट के आसमान में एक नया सितारा है। महज 12-13 साल की उम्र में रणजी ट्रॉफी में पदार्पण करके, उसने न केवल रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराया, बल्कि दुनिया भर के खेल प्रेमियों को भी चकित कर दिया। लेकिन यह असंभव उपलब्धि कैसे संभव हुई? सिर्फ़ प्रतिभा? या इसके पीछे कठोर अनुशासन, उचित आहार और एक मज़बूत फिटनेस रूटीन है? 1. वैभव सूर्यवंशी का निजी जीवन वैभव सूर्यवंशी का निजी जीवन उनकी उम्र से कहीं ज़्यादा अनुशासित है। उनका जन्म लगभग 2010 में बिहार के समस्तीपुर में हुआ था। बचपन से ही क्रिकेट के प्रति उनका एक अजीबोगरीब झुकाव था। जहाँ उनके साथी खिलौनों या वीडियो गेम में व्यस्त रहते थे, वहीं वैभव की दुनिया बल्ले और गेंद के इर्द-गिर्द घूमती थी। उनकी उम्र को लेकर कुछ विवाद भी रहे, क्योंकि इतनी कम उम्र में रणजी ट्रॉफी जैसे बड़े मंच पर खेलना लगभग अविश्वसनीय था। हालाँकि, उनकी प्रतिभा और कौशल ने उन सभी विवादों को पीछे छोड़ दिया है। यह सर्वविदित है कि अपनी पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने अपना पूरा समय क्रिकेट के अभ्यास को समर्पित किया है। उनकी यही अद्भुत एकाग्रता और मानसिक दृढ़ता उन्हें अपने साथियों से अलग बनाती है। 2. वैभव सूर्यवंशी का करियर और रिकॉर्ड करियर और रिकॉर्ड की बात करें तो वैभव सूर्यवंशी की कहानी किसी परीकथा जैसी लगती है। करियर की शुरुआत: वैभव को क्रिकेट से उनके पिता सूर्यनारायण भास्कर ने परिचित कराया था। उनके पिता खुद क्रिकेट के प्रशंसक थे और उन्हें स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण देते थे। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही अपने बेटे की प्रतिभा को पहचान लिया और उसे निखारना शुरू कर दिया। वैभव ने सबसे पहले बिहार अंडर-19 स्तर पर खेलना शुरू किया। रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन: कूच बिहार ट्रॉफी:- रणजी में पदार्पण से पहले, वैभव ने कूच बिहार ट्रॉफी (अंडर-19) में शानदार प्रदर्शन किया था। वहाँ उन्होंने 157 गेंदों पर 76 रनों की शानदार पारी खेली थी। बीनू मानकर ट्रॉफी:- इस टूर्नामेंट में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जिसने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। ऐतिहासिक रणजी पदार्पण: जनवरी 2024 में, वैभव सूर्यवंशी ने बिहार के लिए मुंबई जैसी मज़बूत टीम के खिलाफ रणजी ट्रॉफी में पदार्पण किया। इस पदार्पण के साथ, वह भारत के सबसे कम उम्र के प्रथम श्रेणी क्रिकेटर बन गए। महान सचिन तेंदुलकर जब रणजी में पदार्पण कर रहे थे, तब उनकी उम्र 15 वर्ष थी। वैभव के पदार्पण ने उस रिकॉर्ड को भी नया आयाम दिया। वर्तमान स्थिति: वर्तमान में, वैभव सूर्यवंशी बिहार रणजी टीम के एक प्रमुख सदस्य हैं। हालाँकि उनका अंतर्राष्ट्रीय करियर अभी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन घरेलू क्रिकेट में जिस तरह से वे प्रदर्शन कर रहे हैं, उससे कहा जा सकता है कि वे भारतीय क्रिकेट का भविष्य हैं। वैभव सूर्यवंशी की 144 रनों की ऐतिहासिक पारी एक अविश्वसनीय और विश्व रिकॉर्ड तोड़ने वाला प्रदर्शन था। इस पारी का विवरण नीचे दिया गया है: वैभव की ऐतिहासिक 144 रनों की पारी वैभव सूर्यवंशी की यह विनाशकारी पारी एक टी20 मैच में आई, जो उनकी उम्र से कहीं बड़े मंच पर खेला गया था। टूर्नामेंट:- एशिया कप राइजिंग स्टार्स, 2025। मैच:- भारत ‘ए’ बनाम यूएई। स्थान:- दोहा, कतर। पारी विवरण: 1. धमाकेदार शुरुआत:- वैभव भारत ‘ए’ के ​​लिए ओपनिंग करने उतरे। वह मैच की पहली ही गेंद पर आउट हो सकते थे, लेकिन यूएई के क्षेत्ररक्षक ने उनका आसान कैच छोड़ दिया। और बस यही शुरुआत थी, और फिर इतिहास रच दिया गया। 2. सिर्फ़ 42 गेंदों में 144 रन:- वैभव ने सिर्फ़ 42 गेंदों में 144 रनों की अविश्वसनीय पारी खेली। इस पारी में उनका स्ट्राइक रेट 342.85 से भी ज़्यादा रहा, जो टी20 क्रिकेट में लगभग अकल्पनीय है। 3. रिकॉर्ड तोड़ शतक:- उन्होंने सिर्फ़ 32 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। यह टी20 क्रिकेट में किसी भारतीय बल्लेबाज़ द्वारा बनाया गया संयुक्त रूप से दूसरा सबसे तेज़ शतक है। इस रिकॉर्ड में उन्होंने ऋषभ पंत का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 2018 में 32 गेंदों में शतक जड़ा था। 4. चार छक्कों की झड़ी:- उनकी 144 रनों की पारी में शामिल थे:* 11 चौके* 15 गगनचुंबी छक्के 5. बाउंड्री से 134 रन:- सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उनके 144 रनों में से 134 रन बाउंड्री (चौके और छक्के) से आए। यानी उन्होंने सिर्फ़ 10 रन बनाए। इस पारी का महत्व: रिकॉर्डबुक चर्चा:- सिर्फ़ 14 साल की उम्र में, वैभव टी20 प्रारूप में 35 या उससे कम गेंदों में दो शतक लगाने वाले पहले क्रिकेटर बन गए। (इससे पहले, उन्होंने आईपीएल में सबसे तेज़ शतक भी लगाया था)। टीम का विशाल स्कोर:- वैभव की इस पारी की बदौलत भारत ‘ए’ ने निर्धारित 20 ओवरों में 4 विकेट पर 297 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। प्लेयर ऑफ़ द मैच:- वैभव सूर्यवंशी को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ़ द मैच’ चुना गया। भारत ‘ए’ ने यह मैच 148 रनों के विशाल अंतर से जीत लिया। वैभव का करियर हमें सिखाता है कि उम्र बस एक संख्या है। सही लक्ष्य, कड़ी मेहनत और परिवार के सहयोग से किसी भी उम्र में बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। आपका जो भी सपना हो, उसके प्रति पूरी तरह ईमानदार रहें और उसे अपना सर्वश्रेष्ठ दें। 3. वैभव सूर्यवंशी का परिवार हर सफलता के पीछे एक मज़बूत सहयोग होता है। वैभव सूर्यवंशी के मामले में, वह आधार उनका परिवार है, खासकर उनके पिता। पिता:- वैभव के पिता, सूर्यनारायण भास्कर, खेती-बाड़ी या अन्य कामों में लगे रहते थे, लेकिन उनका ध्यान क्रिकेट पर था। वे न केवल वैभव के पिता थे, बल्कि उनके पहले कोच, मार्गदर्शक और सबसे बड़ी प्रेरणा भी थे। उन्होंने अपने बेटे की प्रतिभा को निखारने में अपना सब कुछ लगा दिया। वे खुद एक छोटी सी अकादमी चलाते हैं और वैभव को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। माँ और परिवार के अन्य सदस्य:- वैभव की माँ और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी इस क्रिकेट यात्रा में उनका पूरा साथ दिया है। ग्रामीण परिवेश से आने के कारण, उनके परिवार ने उन्हें वह … Read more